दिल्ली में घूमने के लिए टॉप 10 टूरिस्ट प्लेस

लाल किला एक बहुत ही खूबसूरत जगह है यह काफी आकर्षित है  यह नेताजी सुभाष मार्ग, चांदनी चौक, नई दिल्ली 110006 में स्थित है लाल किले का निर्माण कार्य 13 मई 1638 को शुरू हुआ इसके लिए खास मुहर्रम का दिन चुना गया इस किले को पूरा बनने में 10 साल का समय 1648 में इस किले का निर्माण कार्य पूरा हुआ शाहजहाँ को लाल रंग से गहरा लगाव था इसलिए दिल्ली के किले को लाल बलुआ पत्थरो से बनाने का निर्णय लिया गया तभी से इस किले को लाल किला बोला जाता है जब यह पूरा बनकर तैयार हुआ उस समय किले की शिल्पकारी और चमक देखकर सभी आश्चर्यचकित रह गए

सबसे पास का मेट्रो स्टेशनः चांदनी चौक

समयः खुलने का समयः सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक

अवकाशः सोमवार

एंट्री फीः 10 रुपए (भारतीयों के लिए), 250 रुपए (विदेशियों के लिए)

साउंड और लाइट शोवयस्कों के लिए एंट्री फीः 80 रुपए बच्चों के लिए एंट्री फीः 30 रुपए

खुलने का समयःशाम 6:00 – 8:30 बजे तक (हिंदी) रात 8:00 -9:30 बजे तक (अंग्रेजी)

 

 

 

क़ुतुब मीनार महरौली नजदीक मेट्रो स्टेशन पर स्थित यह बहुत ही अनोखी कारीगिरी से बनाई गई ईमारत है यह पाँच मंजिल है और हर मंजिल पर एक बेलकनि भी है दिल्ली के अंतिम शासक की पराजय के तत्काल बाद 1193 में कुतुबदीन ऐबक द्वारा इसे 73 मीटर ऊंची विजय मीनार के रूप में निर्मित कराया गया पहली तीन मंजिल लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है और चौथी तथा पांचवी मंजिले मार्बल और बलुआ पत्थरो से निर्मित है

दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों में कुतुब मीनार की शान निराली है। यह दिल्ली के महरौली इलाके में स्थित है। यूनेस्को ने इसे ‘वर्ल्ड हेरिटेज साइट’ का दर्जा दिया है।

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: कुतुब मीनार

खुलने के दिन: रोजाना

प्रवेश शुल्क : 10 रुपये (भारतीय),

250 रुपये (विदेशी)

बंद रहने के दिन: कोई नहीं

 

 

 

गुरुद्वारा बंगला साहिब यह दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण गुरुद्वारों में से एक है यह अपने स्वर्ण मंडित गुम्बद शिखर से एकदम ही पहचान में आ जाता है।  यह नई दिल्ली के बाबा खड़गसिंह मार्ग  पर गोल मार्केट नई दिल्ली के निकट स्थित है। सिखों के आठवें सिख गुरु, गुरु हरकिशन साहिब जी का सम्बन्ध गुरुद्वारा बंगला साहिब और इसके अंदर बने सरोवर से जाना जाता है.मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के शासनकाल के दौरान 1783 में सिख जनरल सरदार भगेल सिंह द्वारा एक छोटे से श्राइन का निर्माण किया और उसी वर्ष दिल्ली में नौ सिख धार्मिक स्थलों के निर्माण को अपनी देखरेख में बनवाया यह गुरुद्वारा प्रतिदिन खुलता है और यहाँ लोग बहुत प्रसन्नता से घूमने आते है इसमें जाने की कोई टिकट नहीं लगती है और यह हमेशा ही खुला रहता है

 

 

अगर आप दिल्ली घूमने का प्लेन बना रहे है तो लोटस टेंपल जरूर घुमएगा दिल्‍ली के नेहरू प्‍लेस में स्थित लोटस टेम्पल एक बहाई उपासना मंदिर है, जहां न ही कोई मूर्ति है और न ही किसी प्रकार की पूजा पाठ की जाती है। लोग यहां आते हैं शांति और सुकून का अनुभव करने। कमल के समान बनी इस मंदिर की आकृति के कारण इसे लोटस टेंपल कहा जाता है। इसका निर्माण सन 1986 में किया गया था। यही वजह है कि इसे 20वीं सदी का ताजमहल भी कहा जाता है।कमल मंदिर में बने इसके भव्य प्रार्थना सभागार में एक बार में करीब ढाई हजार लोग आ सकते है

यहां पहुंचने के लिए आप मेट्रो का प्रयोग कर सकते हैं। नेहरू प्‍लेस से कालका जी मेट्रो स्‍टेशन पहुंचने के बाद 5 मिनट में पैदल चलकर या फिर कोई रिक्‍शा करके आप यहां पहुंच सकते हैं।

गर्मियों के मौसम में सुबह 9 बजे से शाम को 7 बजे तक मंदिर खुलता है और वहीं सर्दियों में सुबह साढ़े 9 बजे से शाम को साढ़े 5 बजे तक के लिए खोला जाता है। यहां पर किसी प्रकार की एंट्री फीस नहीं ली जाती है।

 

 

 

इंडिया गेट नई दिल्ली के यह गेट अविभाजित भारतीय सेना के सैनिकों का सम्मान करने के लिए समर्पित है जिनकी 1914 और 1921 के बीच प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मृत्यु हो गई थी। इस प्रकार के युद्ध स्मारक से शहीद सैनिकों को श्रन्धांजलि मिलती है  और लोगों को उनके विषय में जानने को मिलता है। दिल्ली के लोग और पर्यटक शाम के समय प्रतिदिन इंडिया गेट के पास घूमने जाते हैं और इसके आस-पास के सुंदर नज़रों जैसे फव्वारों, लाइट और  26 जनवरी गणतंत्र दिवस उठाते हैं। सरकार ने इंडिया गेट के पास ही एक ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ बनाने का सोचा है जिसको खासकर 1947 के सशस्त्र बलों के शहीद सदस्यों के सम्मान के लिए बनाया जायेगा।

इंडिया गेट देखने में बहुत ही सुंदर है। इस स्मारक को डिज़ाइन सर एडविन लुटयेंस जो की एक युद्ध स्मारक के डिज़ाइनर थे उन्होंने किया था। वह उस समय IWGC के सदस्य होने के कारण यूरोप में 66 युद्ध स्मारक का डिजाईन किया था।

यहां पर किसी प्रकार की एंट्री फीस नहीं ली जाती है।

 

 

 

जामा  मस्जिद दिल्ली के स्थित एक मस्जिद है इसका निर्माण 1656 में हुआ था यह मस्जिद लाल पत्थर और संगेमरमर का बना हुआ है लाल किले से महज 500 मी. की दुरी पर जामा मस्जिद स्थित है जो भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है इस मस्जिद का निर्माण 1650 में शाहजहाँ ने शुरू करवाया था इसे बनने में 6 वर्ष का समय और 10 लाख रुपए लगे थे बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित इस मस्जिद में उत्तर और दक्षिण द्वारो से प्रवेश किया जा सकता है  जामा मस्जिद जाने के लिए आप मेट्रो का रास्ता भी ले सकते हैं। यहां का सबसे नज़दीकी मेट्रो स्टेशन यलो लाइन पर स्थित चावड़ी बाज़ार है। मेट्रो पर उतरकर वहां से आप या तो रिक्शा या फिर ऑटो नहीं तो पैदल ही मस्जिद तक जा सकते हैं। चावड़ी बाज़ार के अलावा आप चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन पर भी उतर सकते हैं। यह सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 1:30 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक खुली रहती है। जामा मस्जिद में जाने के लिए किसी भी तरह की कोई फीस नहीं है। हालांकि जो भी पर्यटक मस्जिद के अंदर कैमरा लेकर जाना चाहते हैं उन्हें कैमरे किए 100 रुपये बतौर फीस देने होंगे। 

 

 

हुमायू का मकबरा मथुरा रोड और लोथी रोड की क्रांसिग के समीप स्थित बगीचे के बीच बना यह शानदार मकबरा भारत में मुग़ल वास्तुकला का पहला महत्वपूर्ण उदाहरण है इसका निर्माण हुमायू की मृत्यु के बाद 1565 में उसकी ज्येष्ठ विधवा बेगम ने करवाया था संरचना का डिज़ाइन मीरक मिर्ज़ा घीयथ नामक पारसी वास्तुकार ने बनाया था। मकबरे को हुमायूँ की मृत्यु के नौ साल बाद बनवाया गया था। यह बगीचे युक्त मकबरा चारों तरफ से दीवारों से घिरा है जिसमें सुन्दर बगीचे, पानी के छोटी नहरें, फव्वारे, फुटपाथ और कई अन्य चीजें पाई जाती हैं। इस चहारदीवारी में कई अन्य मुगल शासकों की कब्रें हैं। इस जगह के अन्य मकबरों और इमारतों के नाम हैं – चारबाग गार्डेन – यह चतुर्भुजाकार पारसी शैली का बगीचा है और पूरे दक्षिण एशिया में अपने प्रकार का पहला है।

भारतीय यात्रियों के लिए हुमायूँ के मकबरे के लिए प्रवेश टिकट 35 रूपये है। बिम्सटेक और सार्क देशों के पर्यटकों के लिए, हुमायूँ के मकबरे के टिकट की कीमत भी 35 रूपये है। यहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है।

 

 

 

 

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर भारत का एक प्रसिद्ध मंदिर  है जो दिल्ली में स्थित है। अक्षरधाम मंदिर साल 2005 में खोला गया था, जो भगवान स्वामीनारायण को समर्पित है। यमुना अदि के तट पर स्थित अक्षरधाम मंदिर हिंदू धर्म और इसकी प्राचीन संस्कृति को दर्शाता है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापक हिंदू मंदिर के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी जगह बनाई है। स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर की प्रमुख मूर्ति स्वामीनारायण की मूर्ति है और इसके साथ 20,000 भारत के दिव्य महापुरूषों की मुर्तिया भी शामिल हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण जटिल नक्काशीदार संगमरमर और बलुआ पत्थर से करवाया गया है।

अगर आप अक्षरधाम के दर्शन करने के लिए जा रहें हैं तो आपको यहां की सांस्कृतिक नाव की सवारी जरुर करना चहिये। यह यात्रा भारतीय संस्कृति और विरासत के पुराने पन्नों परिचित करवाती है। इसमें वैदिक भारतीयों जैसे आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, कालिदास, चाणक्य और बहुत कुछ का योगदान है। इसके बाद यह सवारी तक्षशिला को दिखाता है, जो दुनिया का पहला विश्वविद्यालय है जिसमें घुड़सवारी और युद्ध के सबक शामिल हैं। वैदिक काल से यह कबीर, मीरा, रामानंद जैसी प्रसिद्ध शख्सियतों को दिखाते हुए धीरे-धीरे मध्य युग में चली जाती है।

अक्षरधाम मंदिर खुलने का समय 

प्रवेश का समय: सुबह 9:30 बजे से 6:30 बजे तक
प्रदर्शनी का समय: 10:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक
प्रदर्शनी का समय: 10 बजे से शाम 5 बजे तक
अक्षरधाम मंदिर वाटर शो टाइमिंग: 7:45 बजे

अक्षरधाम मंदिर का प्रदर्शनी या प्रवेश शुल्क

वयस्क- 170 रूपये
वरिष्ठ नागरिक- 125 रूपये
4 साल से 21 वर्ष के लिए- 100 रूपये
4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए- फ्री

अक्षरधाम मंदिर में वाटर शो देखने का शुल्क

वयस्क- 80 रूपये
वरिष्ठ नागरिक- 80 रूपये
4 साल से 21 वर्ष के लिए- 50 रूपये
4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए- फ्री

अक्षरधाम मंदिर सोमवार के दिन बंद रहता है

 

 

 

 

 

पुराना किला `नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन दीना पनाह नगर का आंतरिक किला है इस किले का निर्माण शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल में 1538 से 1545 के बीच करवाया था यह घूमने के लिए एक बहुत ही अच्छी जगह है पुराना किला इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है। अगर आप दिल्ली की यात्रा करने के लिए जा रहें हैं तो आपको पुराना किला को अपनी यात्रा में अवश्य शामिल करना चाहिए।

  • पुराना किला के तीन प्रवेश द्वार हैं हुमायूं दरवाजा, बारा दरवाजा और तालाकी दरवाजा।
  • पुराना किला में देखने के लिए तीन लोकप्रिय चीजें किला-ए-कुहना मस्जिद, शेर मंडल और परिसर के भीतर स्थित छोटा संग्रहालय हैं।
  • 1541 में हुमायूँ से पुराना किला पर विजय प्राप्त करने पर शेरशाह द्वारा किला-ए-कुहना मस्जिद का निर्माण किया गया था।
  • किले में स्थित एक छोटा सा संग्रहालय मुगलकाल के शानदार और शानदार अवशेषों को प्रदर्शित करता है।

पुराना किला में लाइट एंड साउंड शो टिकट की कीमत

  • वयस्कों के लिए: 100 रूपये
  • बच्चों के लिए: 50 रूपये (3 से 12 साल के बीच)

पुराना किला प्रवेश शुल्क

भारतीय -20 रुपए

विदेशी – 250 रुपए

 

 

 

 

जंतर मंतर का निर्माण 1724 में सवाई जय सिंह दित्तीय ने करवाया था यह ईमारत प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उन्नति की मिसाल है ऐसी वेधशालाओ का निर्माण जयसिंघ ने जयपुर उज्जैन मथुरा और वाराणसी में भी किया था दिल्ली का जंतर मंतर समरकंद की वेधशाला से प्रेरित है मोहमद शाह के शासन में हिन्दू और मुस्लिम खगोल शात्रियो में ग्रहो की स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई थी सवाई जयसिंह ने इसे ख़त्म करने के लिए जंतर मंतर का निर्माण करवाया

जंतर मंतर प्रवेश शुल्क

भारतीय – 15 रुपए

विदेशी – 200 रुपए

जंतर मंतर सुबह 10  बजे से शाम के 6 बजे तक खुला रहता है